सोमवार, 31 अगस्त 2009


चौपाल है हमारे इतिहास की साक्षी,
जहाँ मिल बैठ हमने चदते- उतरते सांझ- सवेरे से मशविरा किया, अपनी छोटी -बडी उलझन को सुलझाया ,
बात की अपनों की , गाँव की सड़क की , कुयें के पानी की और शहिर के उड़ती रवानी की ,
जहा मुद्दे चले गली के, कुचे के , देश के दुनिया के...............
तो चलते हैं एक बार फ़िर चौपाल की राह एक साथ करने कुछ साँझा ................