
मेत्रोपोलीओन मर्जिस्त्रेट तमांग कि इशरत जहान एन्कोउन्टर पर आई रिपोर्ट पर अहमदाबाद हाई कोर्ट का स्टे आर्डर क्या न्यायपूर्ण है ? और सोचने वाली बात है कि अगर स्टे आर्डर नही लगता तो क्या हो जाता ?
शायद माँ को इन्साफ मिल जाता और मोदी सरकार की पुरे भारत मई खिचाई हो जाती । मेरे मन में एक और सवाल आया की बेशक एक पीड़ित माँ को न्याय न मिले मगर मोदी सरकार की झूठी शान में जरा भी कमी नही आनी चाहिए हे न ?
तो सुनिए मोदी के वफादारो की कहानी जिन्होंने एक नाबालिक लड़की इशरत जहान समेत ३ लोगो को मुंबई से किडनेप किया और गुजरात पुलिस की क्राईम ब्रांच के बहादुर सिपाहियों ने इशरत समेत तीनो का अहमदाबाद एन्कोउन्टर कर साबित कर दिया के वो की वो मोदी से मोमी पाने के पुरे हक़दार हैं ।
सवाल ये भी है की गुजरात में भला ऐसे क्यों से दंगे भड़क उठते या आख़िर कौन सा राज्यद्रोह हो जाता अगर जस्टिस तमांग की रिपोर्ट पब्लिक हो जाती ।
और इस देश की मीडिया के तो क्या कहने हें जनाब जो एक बार सरकार ने कहा सो पत्थर की लकीर और तुंरत बड़े बड़े पत्रकारओ ने इशरत को एक आतंकवादी साबित करने में एक पल भी जाया न होने दिया बिना असलियत को जाने ।
खैर अब इशरत की माँ सुप्रीम कोर्ट केचक्कर काट रही है क्योंकि सिय आर्डर की मियाद ०९ सितम्बर को ही खत्तम हो चुकी थी लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही गुजरात हाई कोर्ट का कोई फ़ैसला इस पर सामने आया है ।
इस देश में लगातार एक के बाद एक फैक एनकाउंटर की वारदात सामने आ रही है कुछ दिनों पहले मणि पुर में एक स्टुडेंट का एनकाउंटर और उसके बाद बागपत से उतराखंड काम करने के लिए गए लड़के का पुलिस द्वअर एनकाउंटर और रोज़ न जाने कितने फैक एनकाउंटर हैं जो मीडिया में जगह नही बना पाते अनपे पीछे इन्साफ liye हजारो सवालिया निशाँ छोड़ जाते है । सवाल छोड़ के में भी जा रहा हूँ की फैक एनकाउंटर, जांच और इन्साफ का नाटक और कितना ? और कितना ?



