
ये डर और डेयर कि जंग नही बल्कि लडा़इ है पैसा कमाने कीकलर टीवी पर आने वाला खिलाडी अक्षय कुमार का नया शो जिसमें लडकियां कपडे तो पहनती हैं मगर उतारने के लिए । स्टंट करते समय ढीले कपड़े पहनना तो समझ में आता है मगर खेल के नाम पर आघी नंगी लडकियों को परोसना भला कौन से खेल की मांग है । स्वाल यह उठता है कि कलर टीवी टीआरपी की दौड में बने रहने के लिए किस हद तक जा सकता है ।शायद कसूर वार भाग लेने वाले प्रतियोगी भी उतने ही है जो पैसों के लालच मे शायद किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं और थोडा बहुत कसूर दर्शकों का भेी है जो शायद ही कभी अपनी आवाज या विरोघ चैनल तक पहुंचाते होंगे । कभी कभी लगता है कि दर्शक की आंख चुराने की ये कोशिश प्रसारण को और किस हद तक ले जाएगी ।रखी का स्वंयवर हो या बिग बॉस कि गाली गलोच या फिर बाढ की तरह फेलते जा रहे रोज नये रियलटी शो में रियलटी कम धोखा ज्यादा परोसा जाता है । एक शो का विजेता अगले शो में फिर से प्रतियोगी के भेष में नजर आता है और फिर अगले शो में वही मतलब घूम फिर के वही लोग, वही कैरकटर वही तमाशा वही नाच गाना वही आपसी झगडा वही फुहड टिप्पणी वही एक जैसा मंच मतलब और आखिर में वही दरीयादिल दर्शक जो हमेशाआंखें फाड़े बस वही रिपीटड शो देखने के आदि हो गये हैं । कभी कभी लगता है कि टीवी शो मादक पदार्थों का काम करते हैं जो एक बार फंस गया तो समझो गया ।ो

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